Dear सोनिया गांधी : ये हैं आज़ादी में RSS के योगदान के 7 सबूत आँखें खोलकर पढ़ लीजिए !
लगभग हर मुद्दे पर चुप्पी साधे रखने वाली कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने काफ़ी दिन बाद मुँह खोला है और RSS यानी संघ के लिए ज़हर उगला है । सोनिया गांधी ने ये भी पूछा है कि RSS का आज़ादी में क्या योगदान रहा है , आज की यह हमारी पोस्ट सोनिया गांधी को जवाब के रूप में तो है ही बल्कि सच सामने लाने के लिए भी है । हमारा आग्रह सोनिया गांधी और उनके समर्थकों से ये है कि इन नीचे दी गयी सभी बातों को आखें खोलकर पढ़ लें और इनमे जो भी तथ्य दिए गए हैं उनको अपने तरीक़े से जाँच लें ।
6 अप्रैल 1930 को असहयोग आन्दोलन शुरू हुआ तो संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार जी संघचालक का दायित्व डा.परांजपे को सौंपकर अनेक स्वयंसेवको के साथ आंदोलन में कुद पड़े । मई 1930 को नमक कानुन के बजाए जंगल कानुन तोड़कर संघ ने सत्याग्रह शुरू करने का निर्णय लिया । उन्होंने कहा था कि RSS एक संघटन के नाते नमक सत्याग्रह में भाग नहीं लेगा लेकिन सभी स्वयमसेवक भाग ले सकते हैं ।
बता दें कि डा .हेडगेवार के साथ गए जत्थे में अप्पाजी जोशी ( जो बाद में संघ के सरकार्यवाह बने ) दादाराव परमार्थ (जो बाद में मद्रास प्रान्त के प्रथम प्रान्त प्रचारक बने) , आदि 12 प्रमुख स्वयंसेवक थे , उनको 9 महीने का सश्रम कारावास का दंड दिया गया था ।
ये भी बता दें कि उसके बाद अ.भा.शारीरिक शिक्षण प्रमुख श्री मार्तण्ड राव जोग, नागपुर के जिला संघचालक श्री अप्पाजी हल्दे आदी अनेक स्वयंसेवकों ने भाग लिया तथा शाखाओं के जत्थे ने भी सत्याग्रह में भाग लिया था। सत्याग्रह के समय पुलिस की बर्बरता के शिकार बने सत्याग्रहियों की सुरक्षा के लिए 100 स्वयंसेवकों की टोली बनायीं गयी जिसके सदस्य सत्याग्रह के समय उपस्थित रहते थे ।
RSS का दूसरा योगदान
8 अगस्त 1930 को मनाए गए गढ़वाल दिवस पर अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ जाकर और धारा 144 तोड़कर जुलूस निकलने पर पूलिस की मार से अनेकों स्वयंसेवक घायल हुए थे ।
RSS का तीसरा योगदान
विजयदशमी 1931 को डॉ. हेडगेवार जेल में थे । उनकी विदर्भ के अष्टीचिमुर क्षेत्र में संघ के स्वयंसेवको ने सामानांतर सरकार स्थापित कर दी । स्वयंसेवको ने अंग्रेज़ों द्वारा किए गए असहनीय अत्याचारों का सामना किया। उस समय उस क्षेत्र में 1 दर्जन से अधिक स्वयंसेवकों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया था ।
साथ ही बता दें कि नागपुर के निकट रामटेक के तत्कालीन नगर कार्यवाह श्री रमाकांत केशव देशपांडे उपाख्य बालासाहेब देशपांडे को आंदोलन में भाग लेने पर मृत्यु दंड सुनाया गया था लेकिन आज़ादी के बाद में अपनी सरकार के समय मुक्त होकर उन्होंने बनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की थी ।
It's all about the greatest Indian organisation RSS , "RASHTRIY SWAYAM SEVAK SANGH" in view by S G PAWAR
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Friday, 11 August 2017
To soniya Gandhiji
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