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Saturday, 29 July 2017

Jay Shree Ram

#Samvad कर्नल दिनेश पठानिया समेत सभी 5 सैनिको की उम्रकैद की सजा ख़त्म, मोदी सरकार में मिली जमानत !ये अबतक की सबसे बड़ी खबर है
मोदी सरकार ने ऐसा काम कर दिखाया है जिसकी जितनी तारीफ की जाये वो सब कम है
ये अबतक का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी कार्य है

अगर आप कर्नल पठानिया समेत 5 सैनिको का किस्सा नहीं जानते तो आपको बता दें की
2010 में कर्नल दिनेश पठानिया जम्मू कश्मीर के माछिल में तैनात थे

2010 में आये दिन कश्मीरी मुस्लिम पत्थरबाजी कर सैनिको को घायल कर देते थे
उस ज़माने में न पैलेट गन की छूट थी, और न ही सैनिको को किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने की इज़ाज़त थी

रोज रोज सैनिक घायल होकर अपना इलाज करवाते थे
इसी के बाद 2010 में कर्नल पठानिया ने पत्थरबाज आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही करने का आदेश दे दिया और उनकी टीम ने 3 पत्थरबाज आतंकियों को ढेर कर दिया

2010 में सोनिया-मनमोहन की सरकार थी, फ़ौरन रक्षामंत्रालय ने आर्मी कोर्ट से कर्नल पठानिया समेत 5 सैनिको का कोर्ट मार्शल करते हुए उम्रकैद की सजा सूना दी

अब 2017 में मोदी सरकार के दौरान आर्मी कोर्ट ने रक्षामंत्रालय के सिफारिश पर कर्नल पठानिया समेत सभी 5 सैनिको को जमानत दे दी, और उनकी उम्रकैद की सजा भी ख़त्म कर दी
7 सालों से कर्नल पठानिया और उनके साथी जेल में सड़ रहे थे, वो भी आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए

मोदी सरकार ने 2015 से ही क़ानूनी कार्यवाही शुरू कर दी थी और अब
तमाम क़ानूनी कार्यवही ख़त्म हुई और कर्नल पठानिया समेत सभी 5 सैनिको की उम्रकैद की सजा ख़त्म और सभी को जमानत दे दी गयी
*jai shree ram* 

विश्व हिन्दू परिषद और केशवराम शास्त्री

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विश्व हिन्दू परिषद और केशवराम शास्त्री



गुजरात में 'विश्व हिन्दू परिषद' के पर्याय बने श्री केशवराम शास्त्री का जन्म 28 जुलाई, 1905 को हुआ था। उनके पिता का नाम श्री काशीराम था। धार्मिक परिवार में जन्म लेने के कारण शास्त्री जी को बालपन से ही हिन्दू धर्म ग्रन्थों के अध्ययन में विशेष आनन्द मिलता था। वे अद्भुत मेधा के धनी थे। उन्होंने सैकड़ों ग्रन्थों की रचना की। संयमित जीवन, सन्तुलित भोजन और नियमित दिनचर्या के बल पर वे 102 वर्ष तक सक्रिय रह सके।


1964 की जन्माष्टमी पर मुम्बई के सान्दीपनी आश्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री गुरुजी और हिन्दू समाज के अनेक मत-पन्थों के विद्वानों एवं धर्मगुरुओं की उपस्थिति में विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना हुई। श्री केशवराम शास्त्री वहाँ उपस्थित थे। परिषद की स्थापना की घोषणा होते ही उन्होंने गुजरात प्रदेश विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना की और अपना जीवन इसके लिए समर्पित कर दिया।


अपने घर आकर वे गुजरात में विश्व हिन्दू परिषद को सबल बनाने में लग गये। इसके लिए उन्होंने गुजराती भाषा में ‘विश्व हिन्दू समाचार’ नामक पत्र निकाला। 26वर्ष तक वे उसके सम्पादक रहे। वे कहते थे कि मैं मूलतः साहित्यिक जीव हूँ। लेखन मेरा मुख्य कार्य है। इसलिए यह पत्र मेरी गोद ली हुई सन्तान है। उसका काम दूसरे कार्यकर्त्ता को सौंपने के बाद भी वे उसके लिए लगातार लिखते रहे और उसके प्रकाशन की चिन्ता करते रहे।


परिषद के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन की चर्चा होने पर शास्त्री जी ने उसे गुजरात में करने का प्रस्ताव दिया। उनके आग्रह पर सिद्धपुर में यह अधिवेशन सम्पन्न हुआ। उन्होंने अपने संगठन कौशल के बल पर गुजरात में परिषद का मजबूत तन्त्र खड़ा किया। 7,000 गाँवों में परिषद की समितियाँ उनके सामने खड़ी हो गयीं थीं। सेवा कार्यों पर भी उनका बहुत जोर था। वनवासी क्षेत्र हो या नगरों के निर्धन हिन्दू परिवार; सबके बीच में शिक्षा और चिकित्सा के अनेक प्रकल्प उन्होंने प्रारम्भ कराये। इससे ईसाई मिशनरियों द्वारा स॰चालित धर्मान्तरण के षड्यन्त्रों पर रोक लगी और परावर्तन का क्रम प्रारम्भ हुआ।


शास्त्री जी का सब कार्यकर्ताओं से आग्रह रहता था कि वे संगठन के विस्तार के लिए समय दें। वे स्वयं प्रवास तो करते ही थे; पर प्रतिदिन शाम को चार से पाँच बजे तक विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय पर अवश्य आते थे। अस्वस्थ होने पर कार्यकर्त्ताओं को अपने घर बुलाकर उनसे संगठन सम्बन्धी बात करते रहते थे। स्वर्गवास से दो दिन पूर्व उन्होंने कहा था कि यदि मैं खड़ा हो सका,तो सबसे पहले परिषद कार्यालय पर जाना चाहूँगा।


जब वे 75 वर्ष के हुए, तो गुजरात विश्व हिन्दू परिषद ने उनका ‘अमृत महोत्सव’ मनाया और उनके शतायु होने की कामना की। शास्त्री जी ने अपने अभिनन्दन के प्रत्युत्तर में कहा - "परिषद के विविध कार्य और सेवा प्रकल्प ही मुझमें प्राणबल की पूर्ति करते हैं। जीना है तो इसी ध्येय के लिए जीना, ऐसी हृदय में दृढ़ता है और परमात्मा इसे पूरा करेंगे, ऐसी मेरी आत्मश्रद्धा है।"


छह दिसम्बर, 1992 को बाबरी ढाँचा गिरने पर वे गिरफ्तार कर लिये गये। उन्होंने घोर वृद्धावस्था में भी जेल जाना स्वीकार किया; पर झुकना नहीं। ऐसे समर्पित कार्यकर्त्ता ने नौ सितम्बर, 2006 को अपने जीवनकार्य को विराम दिया। उनकी इच्छानुसार उनके पार्थिव शरीर को विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय लाया गया। इसके बाद ही उनका अन्तिम संस्कार हुआ।

                                         इस प्रकार के भावपूर्ण 

त्रिपुरा के बलिदानी स्वयंसेवक



त्रिपुरा के बलिदानी स्वयंसेवक

विश्व भर में फैले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करोड़ों स्वयंसेवकों के लिए 28 जुलाई, 2001 एक काला दिन सिद्ध हुआ। इस दिन भारत सरकार ने संघ के उन चार वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की मृत्यु की विधिवत घोषणा कर दी, जिनका अपहरण छह अगस्त, 1999 को त्रिपुरा राज्य में कंचनपुर स्थित ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ के एक छात्रावास से चर्च प्रेरित आतंकियों ने किया था।



इनमें सबसे वरिष्ठ थे 68 वर्षीय श्री श्यामलकांति सेनगुप्ता। उनका जन्म ग्राम सुपातला (तहसील करीमगंज, जिला श्रीहट्ट, वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था। श्री सुशीलचंद्र सेनगुप्ता के पांच पुत्रों में श्री श्यामलकांति सबसे बड़े थे। विभाजन के बाद उनका परिवार असम के सिलचर में आकर बस गया।

मैट्रिक की पढ़ाई करते समय सिलचर में प्रचारक श्री वसंतराव, एक अन्य कार्यकर्ता श्री कवीन्द्र पुरकायस्थ तथा उत्तर पूर्व विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र के प्राध्यापक श्री उमारंजन चक्रवर्ती के संपर्क से वे स्वयंसेवक बने।

मैट्रिक करते हुए ही उनके पिताजी का देहांत हो गया। घर की जिम्मेदारी कंधे पर आ जाने से उन्होंने नौकरी करते हुए एम.काॅम. तक की शिक्षा पूर्ण की। इसके बाद उन्होंने डिब्रूगढ़ तथा शिवसागर में जीवन बीमा निगम में नौकरी की। 1965 में वे कोलकाता आ गये। 1968 में उन्होंने गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया। इससे उन्हें तीन पुत्र एवं एक कन्या की प्राप्ति हुई। नौकरी के साथ वे संघ कार्य में भी सक्रिय रहे। 1992 में नौकरी से अवकाश लेकर वे पूरा समय संघ कार्य में लगाने लगे। वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने उनकी योग्यता तथा अनुभव देखकर उन्हें क्षेत्र कार्यवाह का दायित्व दिया।




दूसरे कार्यकर्ता श्री दीनेन्द्र डे का जन्म 1953 में उलटाडांगा में हुआ था। उनके पिता श्री देवेन्द्रनाथ डे डाक विभाग में कर्मचारी थे। आगे चलकर यह परिवार सोनारपुर में बस गया। 1963 में यहां की ‘बैकुंठ शाखा’ में वे स्वयंसेवक बने। यहां से ही उन्होंने 1971 में उच्च माध्यमिक उत्तीर्ण किया।

‘डायमंड हार्बर फकीरचंद काॅलिज’ से गणित (आॅनर्स) में पढ़ते समय उनकी संघ से निकटता बढ़ी और वे विद्यार्थी विस्तारक बन गये। क्रमशः उन्होंने संघ का तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण लिया। प्रचारक के रूप में वे ब्रह्मपुर नगर प्रचारक, मुर्शिदाबाद सह जिला प्रचारक, कूचबिहार, बांकुड़ा तथा मेदिनीपुर में जिला प्रचारक रहे। इसके बाद वे विभाग प्रचारक, प्रांतीय शारीरिक प्रमुख रहते हुए वनवासियों के बीच सेवा कार्यों में भी संलग्न रहे।



51 वर्षीय श्री सुधामय दत्त मेदिनीपुर शाखा के स्वयंसेवक थे। स्नातक शिक्षा पाकर वे प्रचारक बने। पहले वे हुगली जिले में चूंचड़ा नगर प्रचारक और फिर मालदा के जिला प्रचारक बनाये गये। कुछ समय तक उन पर बंगाल के सेवाकार्यों की भी जिम्मेदारी रही। इसके बाद पत्रकारिता में उनकी रुचि देखकर उन्हें कोलकाता से प्रकाशित हो रहे साप्ताहिक पत्र ‘स्वस्तिका’ का प्रबन्धक बनाया गया। अपहरण के समय वे अगरतला में विभाग प्रचारक थे।




बंगाल में 24 परगना जिले के स्वयंसेवक, 38 वर्षीय श्री शुभंकर चक्रवर्ती इनमें सबसे युवा कार्यकर्ता थे। एल.एल.बी. की परीक्षा देकर वे प्रचारक बने। वर्धमान जिले के कालना तथा कारोयात में काम करने के बाद उन्हें त्रिपुरा भेजा गया। इन दिनों वे त्रिपुरा में धर्मनगर जिले के प्रचारक थे।

इन सबकी मृत्यु की सूचना स्वयंसेवकों के लिए तो हृदय विदारक थी ही; पर उनके परिजनों का कष्ट तो इससे कहीं अधिक था, जो आज तक भी समाप्त नहीं हुआ। चूंकि इन चारों की मृत देह नहीं मिली, अतः उनका विधिवत अंतिम संस्कार तथा मृत्यु के बाद की क्रियाएं भी नहीं हो सकीं।



*वेदमंत्राहून आम्हां वंद्य ’वंदे मातरम्‌’वंद्य वंदे मातरम्‌*

माउलीच्या मुक्‍ततेचा यज्ञ झाला भारती
त्यात लाखो वीर देती जीवितांच्या आहुती
आहुतींनी सिद्ध केला मंत्र ’वंदे मातरम्’

याच मंत्राने मृतांचे राष्ट्र सारे जागले
शस्त्रधारी निष्ठुरांशी शांतीवादी झुंजले
शस्त्रहीनां एक लाभे शस्त्र ’वंदे मातरम्’

निर्मिला हा मंत्र ज्यांनी आचरीला झुंजुनी
ते हुतात्मे देव झाले स्वर्गलोकी जाउनी
गा तयांच्या आरतीचे गीत ’वंदे मातरम्‌’

गीतकार: ग.दि.माडगूळकर
संगीतकार: सुधीर फडके
गायक: सुधीर फडके
चित्रपट: वंदे मातरम्‌

सुप्रभात
शुभदिन
*भारत माता की जय*

Jay Shree Ram

जपमाळेचे मणी बोलती
 किती सुंदर आमुचे काम
 स्पर्शुनि आम्हा भक्त घेती
 भगवंताचे नाम , आता म्हणा
 श्रीराम जयराम जय जयराम .........

राम नाम ही वाचा जपते
 चित्त शुद्ध नी शांत होते.
 प्रभु स्वरुपाशी मन हे करते
 सुखद सुखद संवाद आता
 आता तुम्ही म्हणा
 श्रीराम जयराम जय जयराम ...........

स्पर्श आमुचा वाढवी भक्ती
 भक्ताला दे भगवंत शक्ति
 भक्ती शक्ति तैसि मुक्ती
 मिळते मग भक्तास
 आता तुम्ही म्हणा
 श्रीराम जयराम जय जयराम ...........

माळ जपोनि घडले संत
 भासती जणू प्रतिभावंत
 अशा गुरूंचा मिळता मंत्र
 जीवन पण सफल मणी करणार
 आता तुम्ही म्हणा
 श्रीराम जयराम जय जयराम ............

शिरी कुठल्या धर्मी कुठल्याही जाती
 घेऊनिया आम्हाला हाती
 ईश्वर स्मरण जे जे करिती
 सन्मार्गी जाणार संत खरे होणार
 आता तुम्ही म्हणा
 श्रीराम जयराम जय जयराम ............

*।।श्रीराम जयराम जय जयराम ।।�*

वेदमंत्राहून आम्हां वंद्य ’वंदे मातरम्‌’वंद्य वंदे मातरम्‌

*वेदमंत्राहून आम्हां वंद्य ’वंदे मातरम्‌’वंद्य वंदे मातरम्‌*

माउलीच्या मुक्‍ततेचा यज्ञ झाला भारती
त्यात लाखो वीर देती जीवितांच्या आहुती
आहुतींनी सिद्ध केला मंत्र ’वंदे मातरम्’

याच मंत्राने मृतांचे राष्ट्र सारे जागले
शस्त्रधारी निष्ठुरांशी शांतीवादी झुंजले
शस्त्रहीनां एक लाभे शस्त्र ’वंदे मातरम्’

निर्मिला हा मंत्र ज्यांनी आचरीला झुंजुनी
ते हुतात्मे देव झाले स्वर्गलोकी जाउनी
गा तयांच्या आरतीचे गीत ’वंदे मातरम्‌’

गीतकार: ग.दि.माडगूळकर
संगीतकार: सुधीर फडके
गायक: सुधीर फडके
चित्रपट: वंदे मातरम्‌

सुप्रभात
शुभदिन
*भारत माता की जय*

राम कर्ता हे जाणून चित्तीं । जगांत संत ऐसें वर्तती

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🙏🏻🌷 !! * दैनंदिन प्रवचन सेवा* !! 🌷🙏🏻
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🍀!!  राम कर्ता हे जाणून चित्तीं । जगांत संत ऐसें वर्तती !!🍀

जेथे मीपणाचे ठाणें । तेथें दुःखाचें साम्राज्य असणे ।
हा आहे नियम । म्हणून मी सांगतो राखावा नेम ।
सर्वस्वी व्हावें भगवंताचें । 'मी, माझें' सोडून साचें ॥
बाह्य मीपणानें जरी सोडलें । पण अभिमानानें वृत्ति बळावली । तेथें घाताला सुरुवात झाली ॥
बुद्धि करावी स्थिर । नामीं असावें प्रेम अनावर ।
राम कर्ता जाणूनि चित्तीं । जगांत संत ऐसें वर्तती ॥
साधनीं सावधान जाण । हेंच साधकाचे मुख्य लक्षण ॥
बाह्य वेषानें कसाहि नटला । जगाला भुलविता झाला ।
तरीं जोंवरी नाहीं चित्त स्थिर । कसा पावेल रघुवीर ? ॥
आजवर केल्या गोष्टी फार । भल्या बुर्‍या असतील जाण ।
त्याचा न करावा विचार । पुढें असावें खबरदार ॥
मानावी परस्त्री मातेसमान । दुसर्‍याचें न पाहावें उणेपण ।
परनिंदा टाळावी । स्वतःकडे दृष्टी वळवावी ॥
गुणांचे करावें संवर्धन । दोषांचे करावें उच्चाटन ।
याला एकच उपाय जाण । अखंड असावें अनुसंधान ॥

प्रपंच न मानावा सुखाचा । तो असावा कर्तव्याचा ॥
वृत्ति असावी स्थिर । चित्तीं भजावा रघुवीर ॥
असा करा कांही नेम । जेणें जवळ येईल राम ॥
प्रपंचाची धरितां कांस । दुःखचि पावे खास ॥
प्रपंच हाच आधार । प्रपंचाविण निराधार ।
ऐशी होई ज्याची वृत्ति । समाधान न ये त्याचे हातीं ॥
तुम्ही सुज्ञ भाविक जाण । एवढें ऐकावें माझें वचन ॥
दुष्ट मतीची उत्पत्ति । ही दुर्जनाची संगति ।
भावें धरितां रघुपति । सर्व संकटें दूर जाती ॥
वृत्ति असावी खंबीर । ज्याचा आधार रघुवीर ॥
दुर्जनांचे जैसें मन । पाषाणास न फुटे द्रव जाण ।
तैसें प्रपंची इच्छी जो सुख । जें आजवर कोणास न मिळाले देख ॥
प्रपंचाचे दुःख जाण । तें मीपण असल्याची खूण जाण ॥
जगांत वर्तावें, घरांत असावें । व्यवहारांत व प्रपंचांत वागावे । परि न कोठे गुंतावें ॥
फार दिवसांचा वृक्ष झाला । घरांतील घडामोडी दिसती त्याला ।
जैसें तो न सोडी आपलें स्थान । तैसें वागावें आतां आपण ॥
ज्याचें घरी रामाचा वास । तेणें न राहावें कधीं उदास ॥
सदा राखावें समाधान । मुखीं भगवंताचें नाम ॥
आतां प्रेम ठेवा नामीं । कृपा करील चक्रपाणी ॥
आतां करा चित्त स्थिर । हृदयीं धरा रघुवीर ॥
रामावांचून न आणावा विचार । हाच माझा आशिर्वाद ॥

 जेथे नाम तेथे राम । हा ठेवावा विश्वास । कृपा करील रघुनाथ खास ॥

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साहसी व दिलेर : सूर्यप्रकाश जी

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साहसी व दिलेर   : सूर्यप्रकाश जी



श्री सूर्यप्रकाश जी मूलतः पंजाब के स्वयंसेवक थे। विभाजन के बाद उनके परिजन दिल्ली आ गये। 1949में वे राजस्थान में प्रचारक के रूप में आये। 1949 से59 तक वे बीकानेर विभाग में तथा फिर 1971 तक कोटा विभाग में प्रचारक रहे। सब लोग उन्हें ‘सूरज जी भाई साहब’ कहते थे।


जब वे कोटा में प्रचारक होकर आये, तो वहां केवल 25शाखा थीं; पर उनके परिश्रम से कोटा देश में सर्वाधिक300 शाखाओं वाला जिला हो गया। उन्होंने काम के लिए अध्यापकों तथा छात्रावासों को आधार बनाया। इन छात्रों को वे छुट्टियों में निकटवर्ती गांवों में शाखा विस्तार के लिए भेजते थे। उन्होंने कोटा में रात्रि शाखाएं प्रारम्भ कीं। कार्यकर्ता ध्वज और ध्वज दंड के साथ लालटेन भी लेकर जाते थे। बाद में रात्रि शाखा का यह प्रयोग पूरे देश में प्रचलित हुआ। उन्होंने मिल के मजदूरों में भी शाखाएं लगाईं।


उन दिनों संघ के पास साधनों का अभाव था। ऐसे में पैदल या साइकिल से प्रवास कर उन्होंने शाखाओं का जाल बिछाया। वे जहां रहे, वहां की स्थानीय भाषा-बोली में ही बोलते थे। इससे कार्यकर्ताओं में वे शीघ्र ही लोकप्रिय हो जाते थे। आम लोग भी उन्हें अपने बीच का ही व्यक्ति समझते थे। वे अति परिश्रमी, तेजस्वी वक्ता तथा हिसाब-किताब के मामले में बहुत कठोर थे। उन दिनों कार्यकर्ताओं से संपर्क का माध्यम पत्राचार ही था। रात में पत्र लिखते-लिखते जब हाथ से कलम गिरने लगती थी, तभी वे सोते थे।


जिस समय सूरज जी राजस्थान आये, तो अनेक स्थानों पर मुसलमानों का आतंक व्याप्त था। कोटा में हिन्दुओं की डोल यात्राओं पर प्रायः मुसलमान हमला करते थे। मथुराधीश मंदिर में जाने वाली महिलाओं को वे छेड़ते थे। सूरज जी बहुत दिलेर और साहसी व्यक्ति थे। उन्होंने अखाड़े में व्यायाम तथा शस्त्राभ्यास करने वाले सभी जाति के हिन्दू युवकों से संपर्क कर गुंडों की खूब ठुकाई की। इससे डोल यात्रा तथा कोटा के दशहरे मेले की व्यवस्था ठीक हो गयी। कोटा के गुंडे उनके नाम से ही डरने लगे।


सूरज जी ने संघ कार्य के साथ ही अन्य कार्यों को भी ऊर्जा प्रदान की। 1966 में प्रयाग में हुए प्रथम 'विश्व हिन्दू सम्मेलन' में कोटा से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता गये। इसी वर्ष दिल्ली में गोरक्षा के लिए हुए प्रदर्शन में भी कोटा की अच्छी सहभागिता रही। इसके बाद उन्होंने कोटा में विश्व हिन्दू परिषद का सम्मेलन कराया। इसमें पूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद जी, हाड़ोती के राणा, कोटा के महाराज कुमार ब्रजराज सिंह जैसे प्रसिद्ध लोग आये।


उन्होंने 'भारतीय किसान संघ' का पहला प्रांतीय अधिवेशन भी कोटा में कराया। 'विद्यार्थी परिषद' और 'भारतीय मजदूर संघ' के लिए भी उनके प्रयास उल्लेखनीय हैं। उनके तैयार किये हुए अनेक कार्यकर्ता आगे चलकर संघ, राजनीति तथा समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में प्रसिद्ध हुए।


ऐसे श्रेष्ठ कार्यकर्ता सूरज जी गले के कैंसर से पीड़ित हो गये। इससे उन्हें बोलने में बहुत कष्ट होने लगा। मुंबई में अंग्रेजी तथा फिर जयपुर के पास चोमू ग्राम में एक प्रसिद्ध वैद्य से आयुर्वेदिक उपचार कराया गया; पर विधि के विधान के अनुसार 29 जुलाई, 1973 में उनका देहांत हो गया।


सूरज जी ने कोटा में एक भूमि ली थी। उनके देहांत के बाद वहां संघ कार्यालय का निर्माण कराया गया। उसका नाम ‘सूरज भवन’ रखा गया है। वह भवन उनके कर्तत्व,साहस एवं शौर्य की याद दिलाता रहता है।  



                                     

उद्यमेन हि सिद्धयन्ति कार्याणि न मनोरथैः । न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः ॥

उद्यमेन हि सिद्धयन्ति कार्याणि न मनोरथैः ।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः ॥

Any work will not get accomplished just merely by desiring for it's completion. A 'prey' will not by itself come to the mouth of a sleeping lion.

कार्य करने से ही सिद्ध होते हैँ सिर्फ मनोरथ या इच्छा करने से नहीँ ,ठीक उसी प्रकार जैसे सोए हुए सिँह के मुख मे हिरन स्वयँ प्रवेश नहीँ करते ।

वहेदमित्रं स्कन्धेन यावत्कालविपर्ययः । आगतं समयं वीक्ष्य भिंद्याद्घटमिवाश्मनि ॥

वहेदमित्रं स्कन्धेन यावत्कालविपर्ययः ।
आगतं समयं वीक्ष्य भिंद्याद्घटमिवाश्मनि ॥

Carry your enemy on your shoulders if time is against you. But with first opportunity, destroy your enemy, as earthen vessel is broken on a rock. This subhashit tells us that an enemy is always an enemy. If you are not in position to fight with him, temporarily try to please him. But whenever you get a chance, finish him.

जब तक विपरीत समय है तब तक शत्रु को कंधे पर डालकर ले जाना चाहिए, पर योग्य समय आते ही जैसे मटके को पत्थर पर पटककर फोडते हैं वैसे उसका नाश कर देना चाहिए ।

*वेदमंत्राहून आम्हां वंद्य ’वंदे मातरम्‌’वंद्य वंदे मातरम्‌*

*वेदमंत्राहून आम्हां वंद्य ’वंदे मातरम्‌’वंद्य वंदे मातरम्‌*

माउलीच्या मुक्‍ततेचा यज्ञ झाला भारती
त्यात लाखो वीर देती जीवितांच्या आहुती
आहुतींनी सिद्ध केला मंत्र ’वंदे मातरम्’

याच मंत्राने मृतांचे राष्ट्र सारे जागले
शस्त्रधारी निष्ठुरांशी शांतीवादी झुंजले
शस्त्रहीनां एक लाभे शस्त्र ’वंदे मातरम्’

निर्मिला हा मंत्र ज्यांनी आचरीला झुंजुनी
ते हुतात्मे देव झाले स्वर्गलोकी जाउनी
गा तयांच्या आरतीचे गीत ’वंदे मातरम्‌’

गीतकार: ग.दि.माडगूळकर
संगीतकार: सुधीर फडके
गायक: सुधीर फडके
चित्रपट: वंदे मातरम्‌

सुप्रभात
शुभदिन
*भारत माता की जय*

*रोज_संघात_जाईन_म्हणतो।।*

*रोज_संघात_जाईन_म्हणतो।।*

सतत बदलणा-या वावटळी च्या जगात।
जरा स्थिर राहून पाहिन म्हणतो।
ताठ मान आणि कणखर बाणा कमवाया।
*रोज संघात जाईन म्हणतो।।*

इतिहासा पेक्षाही जुना देश आपला,
केंव्हा केंव्हा काय काय घडले?
जो तो आपल्या कुवती नुसार सांगतोय,
अमुक लोक केंव्हा हसले व केव्हा रडले।
ख-या इतिहासाचे मोती सागरातून काढिन म्हणतो।
*रोज संघात जाईन म्हणतो ।।*

शिवाजीची तलवार वा भामाशाहा चा तराजू।
बस चारित्र्याशिवाय कुठे कळते त्यातील आतली बाजू।
सुखी समाजाची सुत्रे शिकून घेईन म्हणतो।
*रोज संघात जाईन म्हणतो।।*

जिकडे पहावे तिकडे जातीचे राजकारण।
थोडे आणखी खोलात जाता दिसते धर्मांतरण।
व्यापक दृष्टी करून समाज एकसुत्रात बांधिन म्हणतो।
*रोज संघात जाईन म्हणतो।।*

तिकडे पाकिस्थान सिमेवर कुरघोडी करतोय।
इकडे देशांतर्गत बाजाराला चिन पोखरतोय।
स्वदेशी अस्मिता मना मनात जागविन म्हणतो।
*रोज संघात जाईन म्हणतो।।*

इंग्रज गेले वापस पण इंग्रजी ठेवून गेले।
इंडियाला भारत करण्या कुणी काय केले?
नव्या पीढी मध्ये प्रखर देशभक्ती जागविन म्हणतो।
*रोज संघात जाईन म्हणतो।।*

संघ संस्कार म्हणजे गीता जी श्रीकृष्णाने सांगितली।
संघसंस्कार म्हणजे वेदोपनिषदं जी नरेंद्राने आचरली।
स्वतःच्या पलिकडे जग पाहायला शिकीन म्हणतो।
*रोज संघात जाईन म्हणतो।।*

संघ म्हणजे न केवळ एक शिस्तबद्ध संघटन।
संघ म्हणजे न केवळ गणवेशातील संचलन।
देशाला पुनर्वैभवाप्रत नेण्यासाठी एक एक व्यक्ती जोडीन म्हणतो।
*रोज संघात जाईन म्हणतो।।*

"सच्चा मुसलमान कभी भी वंदे मातरम नहीं बोलेगा"

"सच्चा मुसलमान कभी भी वंदे मातरम नहीं बोलेगा" -अब्बू आझमी...
*हीच गोष्ट आम्ही कित्येक वर्षे बोलतोय तर आम्ही भगवे आतंकवादी ठरलो*
मी जास्त काही सांगू शकत नाही आणि लिहावस पण वाटत नाही..कारण ते शब्द अपुरे पडतील आणि समजवायला गेलो तर....
तरी पण गुरूजींचा एक श्लोक सांगतो...

कसा कोंबडी पोटी जन्मे गरुड़
कसा भ्याड प्राणी करे घोड़दौड़
ययाति कसा होऊ शकतो विरक्त
मुसलमान तैसा नसे देश भक्त
*आपल्या परिवाराच्या सुरक्षेसाठी हे पूर्ण वाचाच.*🙏🏻               
अबू आझमी यांनी नुकतीच 'वंदे मातरम्' विषयी मांडलेली भूमिका आपण बघितली, ऐकली.. *सच्चा मुसलमान* ह्या शब्दावरून कोणा एका किड्याची नव्हे, तर समस्त शांतताप्रिय समाजाची वृत्ती सहज दिसून येते.... 

आज दुर्दैवाने याच काही शक्ती बलवान होत आहेत. आपल्या हिंदूधर्मावर घातकी वार करत आहेत. पण आपण स्वीकारलेल्या कायद्यांमुळे आपण बांधले गेलो आहोत. परंतु भविष्यातला धोका ओळखून आपणच आता सावध झालो पाहिजे.
आपल्या हिंदू धर्मावरचं सर्वात मोठं संकट म्हणजे मुसलमान समाजाचे वाढते प्रमाण आणि घातपात... आणि *या सर्व प्रकाराला आपल्याकडूनच नकळत खतपाणी घातले जाते ते असे...*

प्रत्येक मुस्लिम कुटुंबाच्या घरून दरमहा एक ठराविक रक्कम मशिदीसाठी भरावी लागते. हे प्रत्येक मुसलमान कुटुंबासाठी सक्तीचे असते. आणि मशिदीकडे जमा झालेला हा पैसा कशासाठी वापरला जातो हे आपल्याला माहीत आहेच.. 
बॉम्बस्फोट,दहशतवाद, हत्यारे,अमर्याद संतती, लव्ह जिहाद सारखे प्रकार आणि इतरही अनेक देशविघातक कृत्य याच पैशातून होतात..
याला आळा घातला पाहिजे. 
यासाठी आपण सर्वजण प्रयत्न करू शकतो...
निश्चय करू की,


'आजपासून कुठलीही वस्तू या समाजाच्या लोकांकडून खरेदी करणार नाही', 


कपडे,फळे,फर्निचर, खाद्यपदार्थ, कोणतीही सेवा, वाहन दुरुस्ती, किंवा इतरही काहीच मुस्लिम लोकांकडून घेणार नाही... 


वेळप्रसंगी एखादी वस्तू वापरणार नाही, परंतु


*माझा खर्च होणारा प्रत्येक रुपया हा हिंदू समाजकडेच वर्ग होईल.* 


माझा कोणताच पैसा हा माझ्या देशाच्या विरोधात खर्च होता कामा नये...


आपण हे नियम प्रत्येकाने आचारणात आणल्याने देशविघातक कृत्याकडे जाणारा खूप सारा पैशाचा ओघ कमी होईल. 
तर आज आपण निश्चय करूया की, आजपासून कोणतीही वस्तू या 'शांतिप्रिय' लोकांकडून खरेदी करणार नाही, आणि इतरांनाही करू देणार नाही...
हीच आपली एकप्रकारे सहजतेने केली जाणारी देश आणि धर्म सेवाच ठरेल...


🚩जयतु हिंदु राष्ट्रम्🚩
🚩🚩  जय भवानी जय शिवाजी🚩🚩

आपल्या परिवाराच्या सुरक्षेसाठी

*आपल्या परिवाराच्या सुरक्षेसाठी हे पूर्ण वाचाच.*🙏🏻              
अबू आझमी यांनी नुकतीच 'वंदे मातरम्' विषयी मांडलेली भूमिका आपण बघितली, ऐकली.. *सच्चा मुसलमान* ह्या शब्दावरून कोणा एका किड्याची नव्हे, तर समस्त शांतताप्रिय समाजाची वृत्ती सहज दिसून येते....

आज दुर्दैवाने याच काही शक्ती बलवान होत आहेत. आपल्या हिंदूधर्मावर घातकी वार करत आहेत. पण आपण स्वीकारलेल्या कायद्यांमुळे आपण बांधले गेलो आहोत. परंतु भविष्यातला धोका ओळखून आपणच आता सावध झालो पाहिजे.
आपल्या हिंदू धर्मावरचं सर्वात मोठं संकट म्हणजे मुसलमान समाजाचे वाढते प्रमाण आणि घातपात... आणि *या सर्व प्रकाराला आपल्याकडूनच नकळत खतपाणी घातले जाते ते असे...*

प्रत्येक मुस्लिम कुटुंबाच्या घरून दरमहा एक ठराविक रक्कम मशिदीसाठी भरावी लागते. हे प्रत्येक मुसलमान कुटुंबासाठी सक्तीचे असते. आणि मशिदीकडे जमा झालेला हा पैसा कशासाठी वापरला जातो हे आपल्याला माहीत आहेच..
बॉम्बस्फोट,दहशतवाद, हत्यारे,अमर्याद संतती, लव्ह जिहाद सारखे प्रकार आणि इतरही अनेक देशविघातक कृत्य याच पैशातून होतात..
याला आळा घातला पाहिजे.
यासाठी आपण सर्वजण प्रयत्न करू शकतो...
निश्चय करू की,


'आजपासून कुठलीही वस्तू या समाजाच्या लोकांकडून खरेदी करणार नाही',


कपडे,फळे,फर्निचर, खाद्यपदार्थ, कोणतीही सेवा, वाहन दुरुस्ती, किंवा इतरही काहीच मुस्लिम लोकांकडून घेणार नाही...


वेळप्रसंगी एखादी वस्तू वापरणार नाही, परंतु


*माझा खर्च होणारा प्रत्येक रुपया हा हिंदू समाजकडेच वर्ग होईल.*


माझा कोणताच पैसा हा माझ्या देशाच्या विरोधात खर्च होता कामा नये...


आपण हे नियम प्रत्येकाने आचारणात आणल्याने देशविघातक कृत्याकडे जाणारा खूप सारा पैशाचा ओघ कमी होईल.
तर आज आपण निश्चय करूया की, आजपासून कोणतीही वस्तू या 'शांतिप्रिय' लोकांकडून खरेदी करणार नाही, आणि इतरांनाही करू देणार नाही...
हीच आपली एकप्रकारे सहजतेने केली जाणारी देश आणि धर्म सेवाच ठरेल...


🚩जयतु हिंदु राष्ट्रम्🚩
🚩🚩  जय भवानी जय शिवाजी🚩🚩

आओ फिर से दिया जलाएँ

#आओ फिर से दिया जलाएँ#
आओ फिर से दिया जलाएँ
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।
आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने-
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ

बिहार

जब बिहार लालू-नीतीश और कांग्रेस की सरकार बनी तो तब मैंने कांग्रेस के एक समझदार नेता से पूछा-कितने दिन चलेगी यह सरकार।
उन्होंने कहा था-'लालू से रहा नहीं जाएगा,नीतीश से सहा नहीं जाएगा,कांग्रेस से कुछ कहा नहीं जाएगा और मोदी-शाह से बैठा नहीं जाएगा। अब इसमें जो पहले हाथ उठा ले......
जवाब आज मिल गया।

इधर तेजस्वी समझ नहीं पा रहे हैं कि नीतीश ने इस्तीफा दिया है या लिया है।


अगर अमित शाह को खुल्ला छोड दे तो बलूचीस्तान मे भी NDA के गठबंधन की सरकार बना देंगे ।

घोटाला उप मुख्यमंत्री ने किया
इस्तीफ़ा मुख्यमंत्री ने दिया
बधाई प्रधानमंत्री ने दी
मेरा तो सर चकरा रहा है....!!!😂

दारू बंद मत करना दोस्त।
दोस्ती टूट जाती है।
अब बिहार में ही देख लो😜😜

देशहित के लिए लड़ाई लड़ो...

✍देशहित के लिए लड़ाई लड़ो...

🔥लड़ नही सकते तो लिखो...

🔥लिख नही सकते तो बोलो...

🔥बोल नहीं सकते तो साथ दो....

🔥साथ भी नहीं दे सकते तो जो लड़ रहे हैं उनका सहयोग करो....

🔥संघर्ष करने के लिए ताकत दो...

🔥अगर ये सब भी न कर सको तो कम से कम दूसरों का मनोबल तो न गिराओ....

क्योकि कहीं न कहीं कोई आपके हक की भी लड़ाई लड़ रहा है...

*🚩🦁💪हिंदुत्व जिन्दाबाद💪🦁🚩*
*🚩🚩🚩जय श्री राम🚩🚩🚩*
*🚩🚩🔱हर हर महादेव🔱🚩🚩*