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Wednesday, 28 August 2024

28 अगस्त/जन्म-दिवस प्रथम प्रचारक : बाबासाहब आप्टे

  28 अगस्त/जन्म-दिवस

प्रथम प्रचारक   : बाबासाहब आप्टे


28 अगस्त, 1903 को यवतमाल, महाराष्ट्र के एक निर्धन परिवार में जन्मे उमाकान्त केशव आप्टे का प्रारम्भिक जीवन बड़ी कठिनाइयों में बीता। 16 वर्ष की छोटी अवस्था में पिता का देहान्त होने से परिवार की सारी जिम्मेदारी इन पर ही आ गयी।


इन्हें पुस्तक पढ़ने का बहुत शौक था। आठ वर्ष की अवस्था में इनके मामा ‘ईसप की कथाएँ’ नामक पुस्तक लेकर आये। उमाकान्त देर रात तक उसे पढ़ता रहा। केवल चार घण्टे सोकर उसने फिर पढ़ना शुरू कर दिया। मामा जी अगले दिन वापस जाने वाले थे। अतः उमाकान्त खाना-पीना भूलकर पढ़ने में लगे रहे। खाने के लिए माँ के बुलाने पर भी वह नहीं आया, तो पिताजी छड़ी लेकर आ गये। इस पर उमाकान्त अपनी पीठ उघाड़कर बैठ गया। बोला - आप चाहे जितना मार लें; पर इसेे पढ़े बिना मैं अन्न-जल ग्रहण नहीं करूँगा। उसके हठ के सामने सबको झुकना पड़ा।


छात्र जीवन में वे लोकमान्य तिलक से बहुत प्रभावित थे। एक बार तिलक जी रेल से उधर से गुजरने वाले थे। प्रधानाचार्य नहीं चाहते थे कि विद्यार्थी उनके दर्शन करने जाएँ। अतः उन्होंने फाटक बन्द करा दिया। विद्यालय का समय समाप्त होने पर उमाकान्त ने जाना चाहा; पर अध्यापक ने जाने नहीं दिया। जिद करने पर अध्यापक ने छड़ी से उनकी पिटाई कर दी।


इसी बीच रेल चली गयी। अब अध्यापक ने सबको छोड़ दिया। उमाकान्त ने गुस्से में कहा कि आपने भले ही मुझे नहीं जाने दिया; पर मैंने मन ही मन तिलक जी के दर्शन कर लिये हैं और उनके आदेशानुसार अपना पूरा जीवन देश को अर्पित करने का निश्चय भी कर लिया है। अध्यापक अपना सिर पीटकर रह गये।


मैट्रिक करने के बाद घर की स्थिति को देखकर उन्होंने कुछ समय धामण गाँव में अध्यापन कार्य किया; पर पढ़ाते समय वे हर घटना को राष्ट्रवादी पुट देते रहते थे। एक बार उन्होंने विद्यालय में तिलक जयन्ती मनाई। इससे प्रधानाचार्य बहुत नाराज हुए। इस पर आप्टे जी ने त्यागपत्र दे दिया तथा नागपुर आकर एक प्रेस में काम करने लगे। इसी समय उनका परिचय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार से हुआ। बस फिर क्या था, आप्टे जी क्रमशः संघ के लिए समर्पित होते चले गये।


पुस्तकों के प्रति उनकी लगन के कारण डा. हेडगेवार उन्हें ‘अक्षर शत्रु’ कहते थे। आप्टे जी ने हाथ से लिखकर दासबोध तथा टाइप कर वीर सावरकर की प्रतिबन्धित पुस्तक ‘सन 1857 का स्वाधीनता संग्राम’ अनेक नवयुवकों को पढ़ने को उपलब्ध करायीं। उन्होंने अनेक स्थानों पर नौकरी की; पर नौकरी के अतिरिक्त शेष समय वे संघ कार्य में लगाते थे।


संघ कार्य के लिए अब उन्हें नागपुर से बाहर भी प्रवास करना पड़ता था। अतः उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरा समय संघ के लिए लगाने लगे। इस प्रकार वे संघ के प्रथम प्रचारक बने। आगे चलकर डा0 जी उन्हें देश के अन्य भागों में भी भेजने लगे। इस प्रकार वे संघ के अघोषित प्रचार प्रमुख हो गये।


उनकी अध्ययनशीलता, परिश्रम, स्वाभाविक प्रौढ़ता तथा बातचीत की निराली शैली के कारण डा. जी ने उन्हें ‘बाबासाहब’ नाम दिया था। दशावतार जैसी प्राचीन कथाओं को आधुनिक सन्दर्भों में सुनाने की उनकी शैली अद्भुत थी। संघ में अनेक दायित्वों को निभाते हुए बाबासाहब आप्टे 27 जुलाई, 1972 (गुरुपूर्णिमा) को दिवंगत हो गये।

Saturday, 20 July 2024

गुरु पूर्णिमा (दिनांक 21-7-24, रविवार)

 गुरु पूर्णिमा 

(दिनांक 21-7-24, रविवार)

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*सनातन वैदिक हिंदू धर्म एवं भारतीय (हिंदू) संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का महत्त्व* जिसमें

*त्याग, शौर्य, सूर्य तेज तथा समर्पण का भाव है।*

*गुरु भगवा ध्वज है एवं हम सब उसके शिष्य।*


_*स्वयंसेवक और गुरुपूजन उत्सव*_


*मैं वर्षभर स्वयं को संघ का स्वयंसेवक कहता हूं, समाज में संघ की बात भी करता हूं, गणवेश भी पहनता हूं, शाखा भी कभी-कभी जाता हूं।*


*समाज के लोगों को स्वयंसेवक बनने के लिए प्रेरित भी करता हूं, जब प्रचारकजी या बड़े भाई साहब आते हैं तो उनको बताता हूं या शाखा में परिचय देते समय बताता हूं कि मैं इतने वर्षों से स्वयंसेवक हूं।*


*'स्टेटस' में अपने गणवेश वाली फोटो भी लगाता हूं, संघ के देशभक्ति गीत व कविताएं, बोध कथाओं के 'स्टेट्स' व प्रचार प्रसार भी करता हूं और परिचय में अपना परिचय देता हूं कि _"मैंने प्राथमिक वर्ग किया है,  मैंने प्रथम वर्ष किया है।"_*

*परम पवित्र भगवा ध्वज को अपना गुरु भी बताता हूं। क्योंकि ये त्याग समर्पण का प्रतीक भी है।*


लेकिन

क्या मैंने वर्ष भर में एक बार आने वाले संघ के _महत्त्वपूर्ण उत्सव_ *गुरु पूजन* व *गुरू दक्षिणा* कार्यक्रम में समर्पण किया?

नहीं किया। *तो फिर मेरा स्वयंसेवक होने का अर्थ ही क्या जब मैंने अपने गुरु की पूजा नहीं की, गुरु को समर्पण नहीं किया।*


*समर्पण का अर्थ _केवल धन, रुपये से नहीं है;_ हम अपने गुरु को समय का भी समर्पण कर सकते हैं, मन का भी समर्पण कर सकते हैं। आत्म भाव का पुष्प या फूल भी चढ़ा सकते हैं।* लेकिन 

*एक स्वयंसेवक का गुरु पूजन होना बहुत ही आवश्यक है।*


*दायित्ववान कार्यकर्ता एवं सक्रिय स्वयंसेवकों का व पुराने स्वयंसेवक कार्यकर्ताओं का भी दायित्व बनता है।*


*सोचिए मैं दायित्ववान स्वयंसेवक हूं।* लेकिन मैं प्रचारकजी/कार्यवाहजी के फोन की राह देख रहा हूं? कि

वह फोन करके मुझे बोले कि *अपनी शाखा व अपने आस पास लगने वाली शाखा पर गुरुपूजन उत्सव/गुरु दक्षिणा कार्यक्रम मनाना है।*

हो सकता है किसी कारण वश यह लोग व्यस्त हो या मुझे 'फोन' नहीं लगा हो, तो *_मैं स्वयं भी तो गुरु पूजन उत्सव का आयोजन कर सकता हूं।_*


जिस बस्ती, गांव, नगर में मैं रहता हूं वहां

*ऐसे भी स्वयंसेवक हैं जो आवश्यकतानुसार सक्रिय नहीं है, प्रतिदिन शाखा नही जाते, तो उनका गुरु पूजन कौन करवाएगा?*

*मैं ही तो हूं जो ऐसे स्वयंसेवकों को सूचना देकर उनका शाखाओं पर गुरु पूजन करवाऊँगा।*

*अगर ऐसे स्वयंसेवकों का गुरु पूजन नहीं हो पाता तो मैं भी उसका दोषी हूं, क्योंकि समय रहते मैंने अपने ग्राम बस्ती नगर, उपखंड, मंडल में गुरु पूजन उत्सव का आयोजन नहीं किया और विभिन्न स्वयं सेवकों को सूचना नहीं दी।*


*अभी भी समय है;*

_गुरु पूजन के लिए, मैं उठूंगा, घर से निकलूंगा, स्वयंसेवकों को सूचना दूंगा और उनका गुरु पूजन अवश्य करवाऊंगा।_

*तब मैं सही स्वयंसेवक कहलाऊंगा।*


वर्षभर में होने वाली गुरु दक्षिणा गुरु/पूजन कार्यक्रम से ही

*पुरे एक वर्ष का कार्यालय व प्रचारकों का तथा शिविर वर्ग तथा उत्सवों एवं अन्य आयामों गतिविधियों के लिए यह सारा धनराशि खर्च होता है।*


_असामयिक मृत्यु को झेलने वाले केरल तथा बंगाल के स्वयंसेवक कार्यकर्ता बन्धुओं के परिवारों का खर्चा भी इसी से चलता है।_

*_प्रत्येक स्वयंसेवक को गुरु दक्षिणा समर्पण करनी चाहिए।_* 


*जिन-जिन व्यक्तियो ने संघ (RSS) की शाखा में व किसी भी कार्यक्रम/उत्सवो में एक बार भी ध्वज प्रणाम कर लिया वह व्यक्ति आजीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घटक अंग समाजसेवी, यानि संघ का कार्यकर्ता, स्वयंसेवक बन जाता है।*


*हिंदू राष्ट्र के प्रतीक आराध्य गुरु _भगवा ध्वज_ सदा फहराता रहे।*


*भारत माता की जय*

*वंदे मातरम्*


~भवदीय 

*एक स्वयंसेवक*

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Tuesday, 2 July 2024

*परम् पूज्य रज्जू भैया जी🚩

 ⛳ *सुप्रभात🌞वन्दे मातरम्*⛳

🐌🪷🍁🐌🐄🐌🍁🪷

आषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष, *द्वादशी*,

रोहिणी नक्षत्र, सूर्य उत्तरायण,

ग्रीष्म ऋतु, युगाब्ध ५१२६,

विक्रम संवत-२०८१,

बुधवार , 03 जुलाई 2024.

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*_प्रभात दर्शन_ :-*

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*¶¶यह राष्ट्र हजारों वर्षों से हिंदू राष्ट्र है , हिंदू बनाना है नहीं है , स्थापित नहीं करना है , इसकी घोषणा भी नहीं करनी है , अपितु हिंदू राष्ट्र का सर्वांगीण विकास करना है। हिंदू अभी सुप्त अवस्था में है थक गया है , जब यह जागेगा तो ऐसी प्रदीप्त और तेजस्विता लेकर जागेगा की सारी दुनिया इसकी कर्मठता से प्रकाशित हो जाएगी¶¶*


   *परम् पूज्य रज्जू भैया जी🚩*

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*🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩*

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            🙏🚩*


Friday, 21 June 2024

परम् पूoडॉo हेडगेवार जी🚩*

  ⛳ *सुप्रभात🌞वन्दे मातरम्*⛳

🐌🪷🍁🐌🐄🐌🍁🪷

ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, *पूर्णिमा*,

पू.षा. नक्षत्र, सूर्य उत्तरायण,

ग्रीष्म ऋतु, युगाब्ध ५१२६,

विक्रम संवत-२०८१,

शनिवार, 22 जून 2024.

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*_प्रभात दर्शन_ :-*

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*वयोवृद्ध लोगों का तो संघकार्य में काफी महत्त्व का स्थान है | वे संघ में महत्त्वपूर्ण कार्य का दायित्व उठा सकते हैं | यदि प्रौढ लोग अपनी प्रतिष्ठा तथा व्यवहार कुशलता का उपयोग संघकार्य के हेतु करें, तो युवकजन अधिकाधिक उत्साह से कार्य कर सकेंगे | बडों के मार्गदर्शन से युवकों की शक्ति कई गुना बढती है और तब संघकार्य अपने निश्चित ध्येय की ओर द्रुत गति से बढता चला जाता है | इसलिए किसी को भी संघ के प्रति उदासीनता नहीं रखनी चाहिए | प्रत्येक को उत्साह तथा हिम्मत से आगे आना चाहिए, कार्य में जुट जाना चाहिए|*

    *परम् पूoडॉo हेडगेवार जी🚩*

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*🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩*

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          * 🙏🚩*